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आयाम के बारे में

राष्ट्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी संस्कृति कितनी गहरी है। ‘आयाम- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुचिराप्पल्ली की हिंदी इकाई’, 2004-05 से इन जड़ों को पोषित कर मजबूत बना रहा है, जब हेमंत कुमार, अनिरुद्ध रॉय और राहुल गाडेवाडीकर ने इसे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुचिरापल्ली की हिंदी साहित्यिक और सांस्कृतिक समाज के रूप में स्थापित करने का विचार लाया।

आयाम उन लोगों को एक खुला मंच प्रदान करता है जो हिंदी साहित्य में योगदान देने के इच्छुक हैं। यह साहित्यिक समूह, तमिलनाडु और पूरे दक्षिण भारत, जहां हिंदी व्यापक रूप से नहीं बोली जाती है, में पहला समूह था  जिसने हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार किया। आयाम की स्थापना के पीछे सामान्य रूप से तिरुचिराप्पल्ली और विशेष रूप से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुचिरापल्ली में हिंदी के प्रति प्रेम को बढ़ावा देना था। इस छात्र समाज का उद्देश्य राष्ट्रीय भाषा ‘हिंदी’ की शान को  में बनाये रखना है।

आयाम एक परिवार के रूप में कार्य करता है जहाँ सभी सदस्य हिंदी संस्कृति और परंपराओं के प्रति अपने लगाव को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रतियोगिताएं और कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इंटर-कॉलेज (अंतर-महाविद्यालयीय) और इंट्रा-कॉलेज स्तरों पर हिंदी साहित्यिक प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हुए सभी सदस्य आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। वे उन लोगों को एक मंच प्रदान करते हैं जो हिंदी साहित्य की प्रशंसा करते हैं और कहानी लेखन, कविता रचना या हिंदी में किसी भी प्रकार की रचना में अपनी रचनात्मकता को आगे लाना चाहते हैं। हिंदी साहित्य पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा, आयाम द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक त्योहारों जैसे- होली, हिंदी दिवस, नवरात्रि, दीपावली, राष्ट्रीय एकता दिवस आदि का आयोजन भी बड़े ही धूम धाम से किया जाता है।

आयाम की गतिविधियाँ:-

  • उमंग - हिंदी सप्ताह

  • फेस्टेम्बर, एनआईटीटी फेस्ट और आवेग में हिंदी साहित्य प्रतियोगिताएं

  • डांडिया नाइट

  • हिंदी सीखने की कक्षाएं

  • होली हंगामा

  • एनआईटीटी की वार्षिक हिंदी पत्रिका ‘प्रतिबिंब’

  • काव्य संध्या